बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि पान मसाला विज्ञापन से जुड़ा विवाद है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ अभिनेता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अजय देवगन का कहना है कि उन्होंने केवल ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन में काम किया था, न कि पान मसाला का प्रचार किया। ऐसे में उन्हें व्यक्तिगत रूप से नोटिस भेजना गलत और मनमाना है। अभिनेता ने अपनी याचिका में सवाल उठाया है कि अगर विज्ञापन को लेकर कोई नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई संबंधित निर्माता कंपनी के खिलाफ होनी चाहिए, न कि केवल विज्ञापन में नजर आने वाले कलाकार के खिलाफ। इस मामले ने एक बार फिर बॉलीवुड सितारों की विज्ञापन संबंधी जिम्मेदारी और ब्रांड प्रमोशन को लेकर बहस छेड़ दी है।
दरअसल, महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त 2026 को अजय देवगन के अलावा शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी नोटिस जारी किया था। तीनों अभिनेता ‘विमल इलायची’ के विज्ञापनों में नजर आए थे। FDA का आरोप है कि इलायची के नाम पर चलाए जा रहे विज्ञापन वास्तव में प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ का अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार करते हैं। विभाग का तर्क है कि ब्रांड की पहचान मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ी हुई है और विज्ञापन में उसी ब्रांड नाम तथा प्रस्तुति का इस्तेमाल होने से उपभोक्ताओं तक प्रतिबंधित उत्पाद का संदेश पहुंच सकता है। महाराष्ट्र में संबंधित पान मसाला उत्पादों पर प्रतिबंध के चलते FDA ने विज्ञापन में शामिल कलाकारों से जवाब मांगा था। उनसे विज्ञापन बंद करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रचार सामग्री हटाने और यह बताने को कहा गया था कि उन्होंने विज्ञापन से पहले किस तरह की जांच-पड़ताल की थी। विभाग ने कलाकारों से उनके विज्ञापन समझौते और उत्पाद से जुड़े दस्तावेज भी मांगे थे।
अजय देवगन ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इलायची उत्पाद का विज्ञापन किया है और पान मसाला का प्रचार नहीं किया। उनकी याचिका के मुताबिक, FDA ने उन्हें जो कारण बताओ नोटिस जारी किया, उसमें पहले से ही उनके खिलाफ निष्कर्ष निकाल लेने जैसा रवैया दिखाई देता है। अभिनेता ने आरोप लगाया है कि विभाग ने उन्हें नोटिस का आधार बनने वाली जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि नोटिस में विज्ञापन बंद करने और आगे कार्रवाई की चेतावनी देने जैसी बातें पहले से ही विभाग की राय तय होने का संकेत देती हैं। अजय की कानूनी टीम ने यह भी सवाल उठाया है कि संबंधित नियमों के तहत सबसे पहले ब्रांड मालिक या निर्माता कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए था। याचिका में FDA की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, ये सभी दलीलें अभिनेता की ओर से अदालत में रखी गई हैं; इन पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अजय देवगन अकेले ऐसे अभिनेता नहीं हैं जिन्हें FDA की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी इसी विज्ञापन अभियान के संबंध में नोटिस भेजे गए थे। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के अनुसार, विभाग की ओर से जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन की बात कही है। मामले को आगे निर्णय के लिए संयुक्त आयुक्त के समक्ष भेजे जाने की तैयारी है। अजय देवगन की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ 4 नवंबर 2026 को सुनवाई कर सकती है। दूसरी ओर, FDA ने संकेत दिया है कि अदालत से कोई अलग निर्देश मिलने तक विभागीय प्रक्रिया जारी रहेगी। अब सबकी नजर अदालत की सुनवाई पर है। यह मामला सिर्फ एक अभिनेता और सरकारी विभाग के बीच कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि इससे यह भी तय हो सकता है कि किसी विवादित ब्रांड के विज्ञापन में शामिल सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी किस सीमा तक मानी जाएगी। आने वाले दिनों में अदालत का रुख इस बहस को नई दिशा दे सकता है।