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Movie Review: ‘धमाल 4’ में स्टारकास्ट ने की पूरी कोशिश, लेकिन कमजोर वीएफएक्स और फीकी कॉमेडी ने किया निराश

कॉमेडी फिल्मों की लोकप्रिय ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी की नई कड़ी ‘धमाल 4’ से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। पिछले भागों की तरह इस बार भी फिल्म से भरपूर हंसी, मजेदार किरदार और मनोरंजन की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, फिल्म देखने के बाद यह महसूस होता है कि दमदार स्टारकास्ट के बावजूद कमजोर वीएफएक्स (VFX), बिखरी हुई पटकथा और कई जगह फीकी पड़ती कॉमेडी फिल्म के अनुभव को प्रभावित करती है। जहां कलाकार अपनी ओर से पूरा प्रयास करते हैं, वहीं तकनीकी और लेखन संबंधी कमियां फिल्म को उस स्तर तक नहीं पहुंचने देतीं, जिसकी दर्शकों को उम्मीद थी।

फिल्म की कहानी एक बार फिर कुछ ऐसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है जो आसान तरीके से बड़ी सफलता हासिल करने का सपना देखते हैं। इसी कोशिश में वे कई हास्यास्पद परिस्थितियों में फंसते हैं और घटनाओं की एक लंबी श्रृंखला शुरू हो जाती है। शुरुआत में कहानी हल्की-फुल्की और मनोरंजक लगती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, पटकथा अपनी पकड़ खोने लगती है। कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं और कुछ कॉमिक सीक्वेंस बार-बार दोहराए गए प्रतीत होते हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका वीएफएक्स है। जिन दृश्यों को तकनीकी रूप से भव्य और प्रभावशाली बनाया जा सकता था, वे कई जगह कृत्रिम और अधूरे लगते हैं। आज के दौर में दर्शक बेहतर विजुअल क्वालिटी की उम्मीद करते हैं, इसलिए कमजोर विजुअल इफेक्ट्स फिल्म के अनुभव को प्रभावित करते हैं। कुछ एक्शन और फैंटेसी से जुड़े दृश्य वास्तविकता से दूर नजर आते हैं, जिससे कहानी का प्रभाव कम हो जाता है।

कॉमेडी किसी भी ‘धमाल’ फिल्म की सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन इस बार कई चुटकुले और हास्य दृश्य अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते। कुछ जगहों पर कॉमिक टाइमिंग अच्छी है और कलाकार दर्शकों को मुस्कुराने में सफल होते हैं, लेकिन पूरी फिल्म में लगातार हंसी बनाए रखने में कहानी असफल नजर आती है। कई दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें और बेहतर लिखा जा सकता था।

अभिनय की बात करें तो फिल्म की पूरी स्टारकास्ट ने अपने-अपने किरदारों को पूरी ऊर्जा के साथ निभाया है। कलाकारों की स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी कई दृश्यों में फिल्म को संभालती है। उनकी कॉमिक टाइमिंग भी कई जगह प्रभावशाली लगती है। हालांकि, जब कहानी और पटकथा कमजोर हो, तो कलाकारों का बेहतरीन प्रदर्शन भी फिल्म को पूरी तरह नहीं बचा पाता।

निर्देशन में मनोरंजन और हास्य का संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है, लेकिन फिल्म कई जगह अपनी लय खो देती है। पहले हाफ में कुछ अच्छे पल हैं, जबकि दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी खिंची हुई महसूस होती है। संपादन में और कसावट होती तो फिल्म का प्रभाव बेहतर हो सकता था।

संगीत फिल्म का औसत पक्ष है। गाने मनोरंजन का हिस्सा जरूर बनते हैं, लेकिन लंबे समय तक याद रहने वाला कोई गीत नजर नहीं आता। वहीं बैकग्राउंड स्कोर कुछ दृश्यों में ऊर्जा बनाए रखने का प्रयास करता है, लेकिन यह भी फिल्म की कमजोरियों को पूरी तरह नहीं छिपा पाता।

सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ लोगों ने फिल्म को हल्का-फुल्का पारिवारिक मनोरंजन बताया, जबकि कई दर्शकों ने कमजोर वीएफएक्स और फीके हास्य की आलोचना की। कई समीक्षकों का मानना है कि यदि कहानी पर अधिक मेहनत की जाती और तकनीकी गुणवत्ता बेहतर होती, तो फिल्म कहीं अधिक प्रभावशाली बन सकती थी।

यदि आप ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी के पुराने प्रशंसक हैं और केवल कलाकारों की कॉमिक केमिस्ट्री देखने के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो इसमें कुछ मनोरंजक पल जरूर मिलेंगे। लेकिन यदि आपकी उम्मीद एक मजबूत कहानी, नए तरह का हास्य और बेहतरीन तकनीकी प्रस्तुति से है, तो फिल्म आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकती।

कुल मिलाकर, ‘धमाल 4’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें कलाकारों ने पूरा प्रयास किया है, लेकिन कमजोर लेखन, असंतुलित हास्य और साधारण वीएफएक्स इसकी सबसे बड़ी कमियां बनकर सामने आती हैं। फिल्म में कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन वे पूरे अनुभव को यादगार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं लगते।

रेटिंग: ⭐⭐½☆☆ (2.5/5)

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