Latest Released MoviesMovie ReviewsMovies

Movie Review- ‘हैवान’ में अक्षय और सैफ की जबरदस्त भिड़ंत, प्रियदर्शन ने सस्पेंस से चौंकाया लेकिन कहानी में दिखी कुछ कमजोरियां

अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी जब एक साथ पर्दे पर आती है तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। इसके साथ अगर निर्देशन की कमान प्रियदर्शन जैसे अनुभवी फिल्ममेकर के हाथ में हो, तो फिल्म से मनोरंजन के साथ-साथ एक मजबूत कहानी की उम्मीद होना स्वाभाविक है। ‘हैवान’ इसी उम्मीद के साथ दर्शकों के सामने आती है और शुरुआत से ही यह साफ कर देती है कि यहां मुकाबला सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि दिमाग का भी है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका कॉन्फ्लिक्ट है, जहां किरदार एक-दूसरे को मात देने के लिए सिर्फ शारीरिक ताकत पर भरोसा नहीं करते, बल्कि अपनी चाल, रणनीति और समझ का इस्तेमाल करते हैं। अक्षय कुमार अपने किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा लेकर आते हैं, वहीं सैफ अली खान का अंदाज फिल्म के माहौल को और गंभीर बनाता है। दोनों कलाकारों के बीच की टकराहट फिल्म को लगातार आगे बढ़ाने का काम करती है और कई जगह ऐसा महसूस होता है कि अगली चाल क्या होगी, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है।

‘हैवान’ की कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा इसका माइंड गेम है। फिल्म दर्शक को लगातार सवाल पूछने पर मजबूर करती है कि आखिर कौन सही है, किसके पास पूरी जानकारी है और कौन किसे इस्तेमाल कर रहा है। प्रियदर्शन ने कहानी को सिर्फ एक साधारण एक्शन मुकाबले की तरह पेश करने के बजाय इसमें सस्पेंस और रणनीति का तड़का लगाने की कोशिश की है। यही वजह है कि फिल्म के कई दृश्य सिर्फ मारधाड़ पर निर्भर नहीं रहते। अक्षय और सैफ के किरदारों के बीच होने वाली बातचीत, उनके हावभाव और परिस्थितियों को समझने का तरीका कहानी में दिलचस्पी बनाए रखता है। अक्षय कुमार का स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की गति को मजबूत करता है और एक्शन वाले हिस्सों में उनका अनुभव साफ दिखाई देता है। दूसरी तरफ सैफ अली खान का किरदार ज्यादा नियंत्रित और रहस्यमयी नजर आता है। उनका अभिनय फिल्म के गंभीर वातावरण के साथ अच्छी तरह फिट बैठता है। दोनों की अभिनय शैली अलग होने के बावजूद पर्दे पर यह अंतर फिल्म के फायदे में जाता है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर भी इसके माहौल को मजबूत करने में योगदान देते हैं। जब कहानी किसी बड़े मोड़ की तरफ बढ़ती है तो तकनीकी पक्ष दर्शक की उत्सुकता बढ़ाने का काम करता है। एक्शन सीक्वेंस में भी फिल्म बड़े पर्दे के अनुभव को ध्यान में रखती हुई दिखाई देती है। हालांकि फिल्म की हर चीज पूरी तरह प्रभावी नहीं है। सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी की गति और कुछ जगहों पर दिखाई देने वाली असमानता है। शुरुआती हिस्से में फिल्म दर्शक को तेजी से अपने साथ जोड़ती है, लेकिन बीच में कुछ घटनाक्रम जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए महसूस हो सकते हैं। कुछ किरदारों को और बेहतर तरीके से विकसित किया जाता तो कहानी का भावनात्मक प्रभाव ज्यादा मजबूत हो सकता था। इसी तरह कुछ ट्विस्ट ऐसे हैं जिनका असर काफी अच्छा पड़ता है, जबकि कुछ मोड़ पहले से अनुमान लगाए जा सकते हैं। फिल्म जिस तरह के दिमागी खेल का वादा करती है, उससे दर्शक की उम्मीद लगातार बढ़ती रहती है और हर मोड़ पर उससे बड़ा चौंकाने वाला खुलासा देखने की इच्छा होती है। यही वजह है कि कुछ जगहों पर फिल्म की कमियां ज्यादा महसूस होती हैं।

कुल मिलाकर ‘हैवान’ एक ऐसी फिल्म है जो अक्षय कुमार और सैफ अली खान की टक्कर को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रखती। फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि दोनों के बीच मुकाबला आंखों और हाथों से ज्यादा दिमाग से होता है। प्रियदर्शन ने सस्पेंस, एक्शन और रणनीति को एक साथ जोड़ने की कोशिश की है और कई जगह वह इसमें सफल भी नजर आते हैं। अक्षय कुमार का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और सैफ अली खान का नियंत्रित अभिनय फिल्म को देखने लायक बनाता है। हालांकि कहानी में कुछ कमजोर हिस्से और गति से जुड़ी कमियां इसके प्रभाव को थोड़ा कम करती हैं। फिर भी अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें सिर्फ धमाकेदार एक्शन नहीं, बल्कि किरदारों के बीच चाल और जवाबी चाल भी देखने को मिले, तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। यह एक परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन बड़े सितारों की टक्कर, प्रियदर्शन की कहानी कहने की शैली और लगातार बने रहने वाले सस्पेंस के कारण इसे एक बार जरूर देखा जा सकता है।

Related Articles