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नाना पाटेकर की आखिरी फिल्मों में दिखेगा बीहड़ों का बागी अंदाज, 40 डिग्री गर्मी में की शूटिंग, इरफान खान को करते थे याद

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पर्दे पर उनकी अदाकारी की झलक दर्शकों को आने वाली फिल्मों में देखने को मिलेगी। उनकी ऐसी ही फिल्मों में शामिल ‘शक्तिशालिनी’ को लेकर एक दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार उनके चिर-परिचित हास्य अंदाज से अलग, गंभीर और बागी तेवरों वाला होगा। फिल्म की कहानी की दुनिया चंबल के बीहड़ों, सामाजिक परिस्थितियों और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित माहौल के इर्द-गिर्द बुनी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वालियर और आसपास के इलाकों में शूटिंग के दौरान तापमान करीब 40 डिग्री तक पहुंच गया था। इसके बावजूद कलाकारों और फिल्म की टीम ने अपना काम जारी रखा। इस प्रोजेक्ट की चर्चा के दौरान दिवंगत अभिनेता इरफान खान का नाम भी सामने आया। नाना उनकी अभिनय क्षमता के बड़े प्रशंसक थे और उनकी फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ को भी पसंद करते थे। नाना की यह फिल्मी विरासत अब उनके प्रशंसकों के लिए खास मायने रखती है।

चंबल के बीहड़ों में दिखेगा नाना का गंभीर अंदाज

‘शक्तिशालिनी’ का निर्देशन आदित्य सरपोतदार कर रहे हैं, जबकि इसकी कहानी दुर्गेश सिंह ने लिखी है। रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग चंबल क्षेत्र, ग्वालियर, भिंड और मुरैना के आसपास की लोकेशनों पर की गई। इन इलाकों के बीहड़, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और प्राकृतिक वातावरण कहानी को एक अलग दृश्यात्मक पहचान देते हैं। नाना पाटेकर का किरदार भी इसी माहौल से जुड़ा बताया जा रहा है। उनका चरित्र गंभीर, दृढ़ और बागी स्वभाव वाला होगा। यह उनके उन किरदारों से अलग नजर आ सकता है, जिनमें उन्होंने हास्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया था। नाना की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि वह किसी भी भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ते थे। चाहे वह ‘क्रांतिवीर’ का आक्रामक किरदार हो या ‘वेलकम’ का हास्यपूर्ण उदय शेट्टी, उन्होंने अलग-अलग अंदाज में दर्शकों का दिल जीता। ‘शक्तिशालिनी’ में उनका नया रूप देखने के लिए प्रशंसक उत्साहित हैं।

40 डिग्री तापमान में हुई शूटिंग

फिल्म की शूटिंग के दौरान गर्मी भी कलाकारों के लिए एक चुनौती रही। रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर और चंबल के आसपास के इलाकों में तापमान करीब 40 डिग्री तक पहुंच गया था। ऐसी परिस्थितियों में लंबे समय तक शूटिंग करना आसान नहीं होता। गर्म हवा, धूल और खुले इलाकों में काम करने के लिए कलाकारों और तकनीकी टीम को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। नाना पाटेकर अपने काम को लेकर बेहद गंभीर माने जाते थे। वह केवल अपने संवाद बोलकर कैमरे के सामने से हट जाने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि दृश्य को बेहतर बनाने और सह-कलाकारों की मदद करने में भी रुचि लेते थे। ‘शक्तिशालिनी’ से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने युवा कलाकारों के साथ अपने अनुभव साझा किए और अभिनय की बारीकियों पर चर्चा की। हालांकि, शूटिंग के हर दिन की परिस्थितियों और नाना के व्यक्तिगत अनुभवों की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन फिल्म का कठिन लोकेशन शेड्यूल इसकी निर्माण प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहा।

इरफान खान की अदाकारी के प्रशंसक थे नाना

नाना पाटेकर और इरफान खान दोनों ही ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अभिनय को केवल संवादों तक सीमित नहीं रखा। उनकी आंखों के भाव, चेहरे की गंभीरता और किरदार के भीतर उतरने की क्षमता उन्हें अलग पहचान देती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, नाना इरफान खान को बेहतरीन अभिनेताओं में गिनते थे और उनकी फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ को पसंद करते थे। यह फिल्म एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी पर आधारित है, जो परिस्थितियों के कारण बीहड़ों और बागी जीवन की दुनिया में पहुंच जाता है। चंबल की पृष्ठभूमि का जिक्र होने पर इस फिल्म की याद आना स्वाभाविक है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ‘शक्तिशालिनी’ की कहानी ‘पान सिंह तोमर’ जैसी ही है। दोनों फिल्मों की कहानी और शैली अलग हैं। इरफान की तरह नाना भी किरदारों में वास्तविकता और गहराई लाने के लिए जाने जाते थे। दोनों कलाकारों की विरासत आज भी सिनेमा प्रेमियों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

अनीत पड्डा के लिए भी सीखने का मौका

‘शक्तिशालिनी’ में अनीत पड्डा और विशाल जेठवा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, अनीत को नाना पाटेकर जैसे अनुभवी अभिनेता के साथ काम करने और उनसे अभिनय की बारीकियां सीखने का अवसर मिला। नाना की कार्यशैली में संवादों की प्रस्तुति, किरदार की मानसिकता और दृश्य की जरूरत को समझने पर खास ध्यान रहता था। वह फिल्म निर्माण की रचनात्मक प्रक्रिया में भी दिलचस्पी लेते थे। बताया गया है कि निर्देशक आदित्य सरपोतदार और लेखक दुर्गेश सिंह ने उन्हें कहानी सुनाने के लिए कई बार उनके फार्महाउस का दौरा किया था। कहानी पर विस्तार से चर्चा हुई और किरदार को समझने में समय लगाया गया। इससे पता चलता है कि नाना किसी प्रोजेक्ट को स्वीकार करने से पहले उसकी कहानी और अपने चरित्र को गंभीरता से समझना पसंद करते थे।

नाना की आखिरी फिल्मी प्रस्तुतियों का इंतजार

नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 को हुआ था। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक अनुभवी और बहुमुखी कलाकार खो दिया। हालांकि, उनकी कुछ फिल्में अभी दर्शकों तक पहुंचनी बाकी हैं। ‘शक्तिशालिनी’ के अलावा ‘ईठा’ और ‘द कॉन्फेशन ऑफ मैरी’ जैसी फिल्मों में भी उनका काम देखने को मिलेगा। ‘शक्तिशालिनी’ में उनका गंभीर और बागी अंदाज उनके प्रशंसकों के लिए खास हो सकता है। फिल्म की रिलीज और अंतिम संपादन से जुड़ी योजनाओं में बदलाव संभव है, इसलिए इसकी अंतिम तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना उचित होगा। नाना की सबसे बड़ी विरासत उनके निभाए किरदार हैं, जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेंगे। आने वाली फिल्मों के जरिए उनकी आवाज, अभिनय और स्क्रीन पर मौजूदगी एक बार फिर दर्शकों के सामने होगी।

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