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मर्दानी 3 का रिव्यू: रानी मुखर्जी की सशक्त वापसी, दमदार मुद्दा लेकिन सेकेंड हाफ में ढीलापन

फिल्म रिव्यू – मर्दानी 3

रानी मुखर्जी की चर्चित फ्रेंचाइजी ‘मर्दानी’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आई है। ‘मर्दानी 3’ एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को उठाती है, जिसमें महिला सुरक्षा, अपराध और सिस्टम की सच्चाई को बेबाकी से दिखाने की कोशिश की गई है। रानी मुखर्जी अपने चिर-परिचित किरदार शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में दमदार वापसी करती हैं, लेकिन मजबूत शुरुआत के बावजूद फिल्म इंटरवल के बाद अपनी रफ्तार खो देती है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे अपराध से शुरू होती है, जो समाज को झकझोर देता है। इस बार मामला सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार एक बड़े और खतरनाक नेटवर्क से जुड़े दिखाए गए हैं। निर्देशक ने शुरुआत में ही माहौल को गंभीर बना दिया है, जिससे दर्शक कहानी से तुरंत जुड़ जाता है। पहले 30–40 मिनट फिल्म को मजबूती से पकड़ते हैं और यह एहसास दिलाते हैं कि आगे कुछ बड़ा होने वाला है।

रानी मुखर्जी का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। वह एक बार फिर यह साबित करती हैं कि क्यों शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार उनके करियर के सबसे प्रभावशाली रोल्स में से एक है। उनकी आंखों में गुस्सा, आवाज में आत्मविश्वास और बॉडी लैंग्वेज में एक सख्त पुलिस ऑफिसर की झलक साफ नजर आती है। एक्शन सीन्स हों या इमोशनल मोमेंट्स, रानी हर जगह खरी उतरती हैं।

फिल्म का पहला हाफ तेज, कसावदार और प्रभावी है। जांच की प्रक्रिया, अपराध की परतें और सिस्टम की खामियां अच्छे तरीके से दिखाई गई हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सस्पेंस और थ्रिल को बढ़ाता है। कुछ सीन्स इतने असरदार हैं कि दर्शक सीट से बंधा रहता है। यही वजह है कि इंटरवल तक फिल्म काफी मजबूत नजर आती है।

हालांकि, इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार अचानक धीमी पड़ जाती है। कहानी जिस तेजी से आगे बढ़ रही होती है, वह सेकेंड हाफ में थोड़ी बिखर जाती है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे खिंच जाते हैं और कई जगहों पर रिपिटेशन महसूस होती है। विलेन का ट्रैक भी उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता, जितनी उम्मीद मर्दानी जैसी फ्रेंचाइजी से की जाती है।

फिल्म का क्लाइमैक्स भावनात्मक जरूर है, लेकिन उसमें वह तीव्रता नहीं दिखती, जो पहले हाफ में महसूस होती है। निर्देशक ने मैसेज पर ज्यादा फोकस किया है, जो सही है, लेकिन सिनेमैटिक एंगल से अगर थोड़ी कसावट होती तो असर और गहरा होता। फिर भी, फिल्म का संदेश स्पष्ट है और अंत तक पहुंचते-पहुंचते दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाता है।

तकनीकी तौर पर फिल्म ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी रियलिस्टिक है और दिल्ली-एनसीआर जैसे लोकेशन्स को सच्चाई के साथ दिखाया गया है। एक्शन सीन्स जमीन से जुड़े हुए हैं, जो फिल्म की थीम के साथ मेल खाते हैं। म्यूजिक ज्यादा नहीं है, लेकिन जो भी है, वह कहानी को सपोर्ट करता है।

मर्दानी 3 कोई हल्की-फुल्की एंटरटेनमेंट फिल्म नहीं है। यह एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को सामने रखती है और दर्शकों को असहज सवालों से रूबरू कराती है। रानी मुखर्जी की परफॉर्मेंस फिल्म को संभाल लेती है, वरना कमजोर सेकेंड हाफ इसे नुकसान पहुंचा सकता था।

कुल मिलाकर, ‘मर्दानी 3’ एक जरूरी फिल्म है, जो मजबूत अभिनय और गंभीर विषय के कारण देखी जानी चाहिए। अगर आप कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा और रियलिस्टिक पुलिस ड्रामा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी, भले ही इसकी रफ्तार इंटरवल के बाद थोड़ी कम हो जाए।

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