बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। इस बार मामला केवल किसी बयान या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। रणवीर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों तक हड़कंप मच गया है। आरोप है कि अभिनेता ने चावुंडी दैव परंपरा और हिंदू भावनाओं का अपमान किया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह से जुड़ा एक वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक की प्रसिद्ध दैव आराधना परंपरा से जुड़ी देवी चावुंडी की तुलना “भूत” से करते हुए मजाक उड़ाया। इस बयान को फिल्म ‘कांतारा’ में दिखाई गई दैवीय परंपरा से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे दक्षिण भारत में गहरी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।
चावुंडी दैव परंपरा कर्नाटक और आसपास के क्षेत्रों में सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक है। इसे केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी सार्वजनिक मंच या इंटरव्यू में इस तरह की टिप्पणी को लोगों ने सीधे तौर पर आस्था पर हमला बताया। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा और रणवीर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार को अपनी लोकप्रियता और प्रभाव का एहसास होना चाहिए। उनके शब्द लाखों लोगों तक पहुंचते हैं और ऐसे में किसी भी धर्म या परंपरा पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करना भारी पड़ सकता है। यही वजह है कि शिकायतकर्ताओं ने इसे केवल मजाक नहीं, बल्कि जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक समूहों ने अभिनेता से सार्वजनिक माफी की मांग की है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर आम आदमी इस तरह की टिप्पणी करता, तो तुरंत कार्रवाई होती, ऐसे में एक सेलेब्रिटी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, कुछ वर्गों का मानना है कि बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया है और इसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है।
रणवीर सिंह की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके फैंस सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में उतर आए हैं। फैंस का कहना है कि अभिनेता का इरादा किसी भी धर्म या परंपरा को ठेस पहुंचाने का नहीं था और यह सब एक गलतफहमी का नतीजा है। हालांकि, विरोध करने वालों का तर्क है कि आस्था के मामलों में “इरादा” नहीं, बल्कि “प्रभाव” देखा जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी बॉलीवुड सेलेब्रिटी को धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर कानूनी पचड़े का सामना करना पड़ा हो। पिछले कुछ वर्षों में कई कलाकारों के बयान, फिल्मों या सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हुए हैं। इससे यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक सम्मान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
फिल्म ‘कांतारा’ के बाद दैव आराधना और स्थानीय परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। ऐसे में किसी भी तरह की टिप्पणी लोगों को और ज्यादा संवेदनशील लगती है। यही कारण है कि यह विवाद केवल रणवीर सिंह तक सीमित न रहकर, पूरे बॉलीवुड की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि रणवीर सिंह इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे या कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेंगे? फिलहाल इतना तय है कि यह विवाद जल्द शांत होने वाला नहीं है और इससे फिल्म इंडस्ट्री को एक बार फिर यह सीख मिलती है कि संस्कृति और आस्था से जुड़े मुद्दों पर शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना जरूरी है।