एक्शन, जासूसी और बड़े स्टारकास्ट से सजी फिल्मों का दर्शकों को हमेशा इंतजार रहता है। जब किसी फिल्म में आलिया भट्ट जैसी लोकप्रिय अभिनेत्री और बॉबी देओल जैसे दमदार कलाकार एक साथ नजर आएं, तो उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं। ‘अल्फा’ भी ऐसी ही फिल्म है, जिसे लेकर रिलीज से पहले काफी चर्चा रही। शानदार ट्रेलर, बड़े पैमाने पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस और हाई-ऑक्टेन स्पाई ड्रामा ने दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा की थी। लेकिन सिनेमाघरों में पहुंचने के बाद फिल्म यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या केवल शानदार प्रस्तुति और स्टार पावर किसी फिल्म को यादगार बना सकती है, या फिर उसके लिए मजबूत कहानी भी उतनी ही जरूरी होती है।
फिल्म की कहानी एक गुप्त मिशन के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा खतरा सामने आता है। इस मिशन को पूरा करने की जिम्मेदारी एक साहसी एजेंट के कंधों पर होती है, जिसका किरदार आलिया भट्ट ने निभाया है। कहानी की शुरुआत काफी प्रभावशाली होती है और शुरुआती घटनाएं दर्शकों को बांधकर रखती हैं। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, कहानी में वह गहराई और रोमांच नहीं बन पाता जिसकी उम्मीद एक बड़े स्पाई थ्रिलर से की जाती है। कई मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं और कुछ घटनाएं बिना पर्याप्त आधार के तेजी से आगे बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि फिल्म का भावनात्मक और थ्रिल वाला प्रभाव पूरी तरह नहीं बन पाता।
आलिया भट्ट ने अपने किरदार में पूरी ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाया है। एक्शन सीक्वेंस से लेकर भावनात्मक दृश्यों तक उनका प्रदर्शन प्रभावशाली है। उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ रोमांटिक या ड्रामा फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक्शन शैली में भी मजबूत पकड़ रखती हैं। कई कठिन स्टंट और तेज रफ्तार एक्शन दृश्यों में उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है। हालांकि, कमजोर पटकथा उनके अभिनय की चमक को पूरी तरह उभरने नहीं देती।
फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज बॉबी देओल का किरदार है। सीमित स्क्रीन टाइम मिलने के बावजूद वह हर बार स्क्रीन पर आते ही प्रभाव छोड़ते हैं। उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज कहानी में रोमांच पैदा करता है। उनके संवाद, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। कई जगह ऐसा महसूस होता है कि यदि उनके किरदार को और विस्तार दिया जाता, तो फिल्म का प्रभाव कहीं अधिक मजबूत हो सकता था। सहायक कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है और फिल्म की गति बनाए रखने में योगदान दिया है।
निर्देशन की बात करें तो फिल्म का स्केल काफी बड़ा दिखाई देता है। विदेशी लोकेशन, शानदार सिनेमैटोग्राफी और हाई-क्वालिटी एक्शन सीक्वेंस फिल्म को विजुअली आकर्षक बनाते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों में रोमांच बढ़ाता है और तकनीकी रूप से फिल्म काफी मजबूत नजर आती है। एडिटिंग भी अधिकांश हिस्सों में सटीक है, लेकिन दूसरे हाफ में कुछ दृश्य अनावश्यक रूप से लंबे महसूस होते हैं। यदि पटकथा को और कसावट दी जाती तो फिल्म का प्रभाव कई गुना बेहतर हो सकता था।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले है। स्पाई थ्रिलर होने के बावजूद इसमें नएपन की कमी महसूस होती है। कई ट्विस्ट पहले से अनुमानित लगते हैं और कुछ भावनात्मक दृश्य दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव नहीं बना पाते। क्लाइमेक्स भी उम्मीद के मुताबिक बड़ा असर छोड़ने में सफल नहीं होता। फिल्म में एक्शन भरपूर है, लेकिन कहानी उस स्तर का रोमांच पैदा नहीं कर पाती जो दर्शक इस शैली की फिल्मों से चाहते हैं।
कुल मिलाकर ‘अल्फा’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने शानदार विजुअल्स, दमदार एक्शन और कलाकारों के बेहतरीन अभिनय की वजह से देखने लायक बनती है। आलिया भट्ट का आत्मविश्वास और बॉबी देओल का प्रभावशाली किरदार इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। हालांकि, कमजोर कहानी और औसत पटकथा फिल्म को एक यादगार स्पाई थ्रिलर बनने से रोक देती है। यदि आप बड़े बजट की एक्शन फिल्में और शानदार सिनेमैटोग्राफी पसंद करते हैं, तो ‘अल्फा’ आपको मनोरंजन दे सकती है। लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता मजबूत कहानी और अप्रत्याशित ट्विस्ट हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाएगी।