तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में शुमार विजय थलपति की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ को बड़ा कानूनी झटका लगा है। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में सिंगल जज द्वारा दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके बाद इस फिल्म का भविष्य एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। खास बात यह है कि ‘जन नायकन’ को विजय थलपति की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, ऐसे में इस फैसले ने न सिर्फ मेकर्स बल्कि फैंस को भी गहरी निराशा में डाल दिया है।
फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी विवाद चल रहा था। सिंगल जज ने पहले एक आदेश पारित किया था, जिससे फिल्म के पक्ष में राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उस आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले ने फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और आगे की प्रक्रिया पर सीधा असर डाला है। बताया जा रहा है कि यह मामला फिल्म के टाइटल, अधिकारों और कुछ कानूनी आपत्तियों से जुड़ा हुआ है, जिस पर अब दोबारा सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
विजय थलपति के करियर की बात करें तो उन्होंने दशकों तक तमिल सिनेमा पर राज किया है। एक्शन, इमोशन और सोशल मैसेज से भरपूर फिल्मों के जरिए उन्होंने हर वर्ग के दर्शकों का दिल जीता। ‘जन नायकन’ को उनके फिल्मी सफर का ग्रैंड फिनाले माना जा रहा था। फिल्म के नाम से ही साफ है कि यह कहानी जनता के नेता, सामाजिक सरोकार और सिस्टम से टकराव जैसे मुद्दों पर आधारित है। यही वजह है कि फैंस इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित थे।
मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर विजय थलपति के फैंस की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कोई इसे अभिनेता के साथ नाइंसाफी बता रहा है तो कोई उम्मीद जता रहा है कि जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #JanNayakan और #ThalapathyVijay ट्रेंड करने लगे हैं। फैंस का कहना है कि अगर यह वाकई विजय की आखिरी फिल्म है, तो उसे बिना रुकावट दर्शकों तक पहुंचना चाहिए।
फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह कानूनी अड़चनें भले ही अस्थायी हों, लेकिन इससे फिल्म की टाइमलाइन जरूर प्रभावित होगी। मेकर्स को अब नए सिरे से कानूनी रणनीति बनानी होगी। संभव है कि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करें या फिर विवादित मुद्दों को सुलझाकर आगे बढ़ें। हालांकि, इससे प्रोडक्शन कॉस्ट और रिलीज प्लान पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
विजय थलपति की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए भी ‘जन नायकन’ को खास माना जा रहा था। कई लोग इसे उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देख रहे थे। ऐसे में इस फिल्म पर आया कानूनी संकट सिर्फ एक सिनेमाई मुद्दा नहीं, बल्कि इससे जुड़े भावनात्मक और सामाजिक पहलू भी हैं। यही कारण है कि यह खबर तेजी से सुर्खियों में छा गई है।
अब सवाल यही है कि क्या ‘जन नायकन’ सभी बाधाओं को पार कर पाएगी या यह विवाद विजय थलपति की आखिरी फिल्म के रूप में इसे अधूरा सपना बना देगा। फिलहाल मेकर्स और फैंस दोनों को कोर्ट के अगले कदम का इंतजार है। एक बात तय है कि इस फैसले ने तमिल सिनेमा में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।