साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। करीब 4 मिनट 38 सेकेंड लंबे इस ट्रेलर में जबरदस्त एक्शन, बंदूकों की तड़तड़ाहट, खतरनाक किरदार और बड़े स्तर की सिनेमाई दुनिया दिखाई गई है। ट्रेलर को देखकर साफ लगता है कि मेकर्स ने फिल्म के विजुअल स्केल और एक्शन पर जमकर पैसा खर्च किया है। हालांकि, इतनी भव्यता के बावजूद सबसे बड़ा सवाल कहानी को लेकर खड़ा होता है। ट्रेलर में तमाम घटनाएं होती दिखती हैं, लेकिन कहानी आखिर कहना क्या चाहती है, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाता।
यश की स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा से उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। ‘केजीएफ’ जैसी फिल्मों के बाद दर्शकों को उनसे एक बार फिर वैसा ही दमदार और प्रभावशाली अवतार देखने की उम्मीद थी। ‘टॉक्सिक’ के ट्रेलर में उनका लुक जरूर आकर्षक है। वह सूट से लेकर रफ और रॉ अवतार तक कई अंदाज में नजर आते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीन भी ध्यान खींचते हैं, लेकिन ट्रेलर खत्म होने के बाद भी यश का किरदार दर्शकों के मन में उस तरह की छाप नहीं छोड़ता, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।
ट्रेलर की सबसे बड़ी खासियत इसका एक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट है। कई दृश्यों में बड़े सेट, हथियार, कार चेज, गोलियों की बौछार और हिंसक टकराव देखने को मिलते हैं। सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक डार्क और स्टाइलिश दुनिया देने की कोशिश करती है। कैमरा एंगल और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाते हैं। बड़े पर्दे पर इन सीक्वेंस का अनुभव निश्चित रूप से ट्रेलर से ज्यादा शानदार हो सकता है।
लेकिन समस्या यह है कि एक्शन की भरमार कहानी की कमी को छिपा नहीं पाती। ट्रेलर में लगातार नए किरदार, नई लोकेशन और अलग-अलग घटनाएं दिखाई जाती हैं, मगर इनके बीच संबंध आसानी से समझ नहीं आता। दर्शक को यह जानने में मुश्किल होती है कि मुख्य संघर्ष आखिर किसके बीच है और यश का किरदार इस पूरी दुनिया में क्या हासिल करना चाहता है। एक अच्छे ट्रेलर का काम फिल्म के प्रति उत्सुकता पैदा करना होता है, लेकिन यहां कई जगह उत्सुकता की जगह उलझन पैदा होती है।
फिल्म का टोन भी काफी डार्क नजर आता है। अपराध, सत्ता, हिंसा और माफिया जैसी दुनिया को बड़े स्तर पर पेश किया गया है। मेकर्स ने कहानी को साधारण गैंगस्टर ड्रामा से अलग दिखाने की कोशिश की है। हालांकि, ट्रेलर से यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि फिल्म वास्तव में किस दिशा में जाएगी। यदि फिल्म की कहानी मजबूत है और ट्रेलर जानबूझकर उसे छिपा रहा है, तो यह रणनीति रिलीज के बाद काम कर सकती है। लेकिन अगर कहानी भी ट्रेलर की तरह बिखरी हुई हुई, तो फिल्म के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
यश के प्रशंसकों के लिए ट्रेलर में कई ऐसे पल हैं जो उत्साह बढ़ाते हैं। उनका लुक, एक्शन और स्क्रीन पर मौजूदगी निश्चित रूप से फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी में से एक है। मगर ‘केजीएफ’ के बाद यश के स्टारडम का स्तर इतना बढ़ चुका है कि दर्शक उनसे सिर्फ स्टाइल और एक्शन नहीं, बल्कि एक मजबूत किरदार और यादगार कहानी की भी उम्मीद करते हैं।
ट्रेलर में सपोर्टिंग कास्ट की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण नजर आती है। कई किरदारों को रहस्यमय तरीके से पेश किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिल्म में रिश्तों और किरदारों की कई परतें हो सकती हैं। हालांकि, 4 मिनट 38 सेकेंड के ट्रेलर में इतनी जानकारी देने के बावजूद मुख्य कहानी का साफ न होना थोड़ा निराश करता है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और तकनीकी पक्ष ट्रेलर को ऊर्जा देते हैं। एडिटिंग कई जगह तेज है, जिससे एक्शन का प्रभाव बढ़ता है। वहीं कुछ दृश्यों में जरूरत से ज्यादा कट और घटनाओं की तेजी कहानी को समझने में बाधा बनती है। ट्रेलर को थोड़ा संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जाता तो शायद दर्शकों को फिल्म की दुनिया और मुख्य संघर्ष बेहतर समझ आता।
कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ का ट्रेलर भव्य जरूर है, लेकिन कहानी के स्तर पर कई सवाल छोड़ जाता है। बंदूकें खूब चलती हैं, किरदार लगातार सामने आते हैं और यश का स्वैग भी नजर आता है, मगर वह जादू पूरी तरह महसूस नहीं होता जिसकी उम्मीद ‘केजीएफ’ स्टार से की जाती है। फिल्म की असली परीक्षा अब सिनेमाघरों में होगी, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि मेकर्स की भव्य दुनिया के पीछे कहानी कितनी मजबूत है।
ट्रेलर पर फैसला: विजुअल्स और एक्शन के लिए उत्सुकता बढ़ती है, लेकिन कहानी की स्पष्टता और यश के किरदार की गहराई को लेकर अभी भी इंतजार करना होगा।