बॉलीवुड में विवादों और सेंसरशिप की कहानियां नई नहीं हैं। हाल ही में चर्चाओं में आई फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ को लेकर फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फिल्म की रिलीज़ पर बैन लगा दिया है, जिसके बाद फिल्म इंडस्ट्री से लेकर आम दर्शकों तक में नाराजगी का माहौल है। इसी बीच प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन खुलकर फिल्म के समर्थन में उतर आया है। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर यह बैन हटाने की मांग की है।
बैन से प्रोड्यूसर्स को भारी नुकसान का डर
एसोसिएशन का कहना है कि फिल्म बनाने में करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं और अगर इसे पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में रिलीज़ नहीं किया गया, तो निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी फिल्म को बैन करना लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ है।
एसोसिएशन का पीएम मोदी को पत्र
प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि:
- ‘द बंगाल फाइल्स’ का मकसद किसी जाति या समुदाय को आहत करना नहीं है, बल्कि यह फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है।
- बैन लगाने से फिल्म इंडस्ट्री का मनोबल टूटता है और क्रिएटिविटी पर रोक लगती है।
- केंद्र सरकार को दखल देकर पश्चिम बंगाल में लगे इस बैन को तुरंत हटाना चाहिए।
बैन लगाने की वजह
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फिल्म को ‘सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली’ बताते हुए बैन किया है। उनका कहना है कि फिल्म के जरिए समाज में नफरत फैल सकती है और इससे राज्य की शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है।
हालांकि, फिल्म के मेकर्स का दावा है कि उन्होंने किसी भी सीन या डायलॉग के जरिए किसी वर्ग को निशाना नहीं बनाया है।
फिल्म की कहानी
‘द बंगाल फाइल्स’ को लेकर कहा जा रहा है कि यह फिल्म बंगाल में हुए राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों पर आधारित है। फिल्म की कहानी उन घटनाओं को सामने लाती है जिनका असर वहां की आम जनता पर गहरा पड़ा।
निर्माताओं के मुताबिक, फिल्म का मकसद केवल दर्शकों को सच्चाई से रूबरू कराना है।
इंडस्ट्री में गुस्सा और बहस
बैन लगने के बाद बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े नामों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि अगर कोई फिल्म विवादास्पद है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उसे बैन कर देना सही रास्ता नहीं है।
कई एक्टर्स और फिल्मकारों ने ट्वीट कर पीएम मोदी से दखल देने की अपील की है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस बैन को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं अधिकतर यूजर्स का कहना है कि फिल्म को रिलीज़ होने देना चाहिए और जनता पर छोड़ देना चाहिए कि वह इसे देखना चाहती है या नहीं।
निष्कर्ष
‘द बंगाल फाइल्स’ पर लगा यह बैन एक बार फिर से इस बहस को जन्म देता है कि आखिर फिल्मों पर पाबंदियां लगाना कहां तक सही है। जब प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन जैसी बड़ी संस्था सामने आकर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करती है, तो यह साफ है कि इंडस्ट्री इस फैसले से बेहद नाराज है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है।