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राजपाल यादव के चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, फिल्मी अंदाज में कोर्ट की टिप्पणी, अभिनेता को जमा करने होंगे दो करोड़ रुपये

बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपनी फिल्मों की वजह से नहीं, बल्कि एक लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद के कारण सुर्खियों में हैं। 7 अक्टूबर 2026 को चेक बाउंस से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर नाराजगी जताई। अदालत ने अभिनेता को कुल 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। राजपाल यादव सुनवाई के दौरान खुद अदालत में मौजूद थे और उन्होंने 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी पेश किया। बाकी 85 लाख रुपये एक संपत्ति की बिक्री के जरिए जमा किए जाने की बात कही गई है।

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। राजपाल यादव की 2012 में आई फिल्म ‘अता पता लापता’ का जिक्र करते हुए अदालत ने फिल्म के नाम पर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की कि फिल्म की तरह उनका पैसा भी ‘अता पता लापता’ हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राजपाल यादव अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं, तो इससे उनकी सार्वजनिक छवि को दोबारा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसी दौरान अदालत ने मजाक में यह भी कहा कि वहां मौजूद कुछ वकील अच्छे अभिनेता भी हैं और उन्हें फिल्म में लिया जा सकता है।

दरअसल, यह मामला काफी पुराना है और इसकी जड़ें राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2010 में फिल्म प्रोजेक्ट के लिए राजपाल यादव को एक निजी कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मिली थी। बाद में रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए। इसी के बाद कानूनी विवाद शुरू हुआ और मामला कई वर्षों तक अलग-अलग अदालतों में चलता रहा। सितंबर 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को बकाया रकम के संबंध में 2 करोड़ रुपये जमा करने का अंतिम अवसर दिया था।

राजपाल यादव ने अदालत में अपनी आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अभिनेता के अनुसार, ‘अता पता लापता’ के कारण भी उन्हें बड़ा नुकसान हुआ और फिल्म को अपेक्षित रिलीज नहीं मिल सकी। उन्होंने अदालत को बताया कि फिल्म पर करीब 22 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और उन्हें इससे लगभग 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राजपाल ने यह भी कहा कि पिछले 13 वर्षों में उनका कुल नुकसान 200 से 250 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि ये आंकड़े अभिनेता द्वारा अदालत में बताए गए उनके दावे हैं, अदालत द्वारा तय नुकसान की राशि नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राजपाल यादव के रवैये को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया कि पहले भी उन्हें भुगतान के लिए समय दिया गया था और अब अदालत का मुख्य उद्देश्य शिकायतकर्ता की बकाया रकम की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो उनकी सजा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि अदालत ने उनकी याचिका पर तुरंत अंतिम फैसला नहीं किया और भुगतान की व्यवस्था के लिए उन्हें समय दिया।

राजपाल यादव की ओर से इस बार भुगतान की व्यवस्था के लिए कदम उठाया गया है। अभिनेता ने अदालत में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया। बाकी 85 लाख रुपये के लिए उनकी संपत्ति के संभावित खरीदार के अदालत में मौजूद होने की जानकारी दी गई। इस व्यवस्था के तहत शेष राशि जमा करने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने भुगतान की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए आगे की सुनवाई का रास्ता खुला रखा है।

इस पूरे मामले में ‘अता पता लापता’ फिल्म का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह फिल्म राजपाल यादव के लिए खास इसलिए भी थी क्योंकि उन्होंने इसमें अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली थी। फिल्म से जुड़ी आर्थिक परेशानियां और कानूनी विवाद अब वर्षों बाद भी उनका पीछा कर रहे हैं। हालांकि राजपाल यादव का फिल्मी करियर इससे कहीं बड़ा है और वह हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमेडी और अलग अंदाज के लिए लंबे समय से पहचाने जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान फिल्मी अंदाज में हुई टिप्पणियों ने इस गंभीर कानूनी मामले को सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना दिया। खासकर वकीलों की एक्टिंग और राजपाल यादव की फिल्म के नाम को लेकर की गई टिप्पणी लोगों को काफी दिलचस्प लगी। लेकिन मजाकिया टिप्पणी के पीछे अदालत का रुख बेहद गंभीर रहा। अभिनेता को निर्धारित रकम जमा करने के निर्देश के साथ यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि मामले में अब और देरी को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम 2 करोड़ रुपये की पूरी राशि जमा करना है। राजपाल यादव ने 1.15 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी है, जबकि बाकी 85 लाख रुपये के भुगतान की व्यवस्था संपत्ति की बिक्री से की जा रही है। अदालत ने भुगतान के बाद उनकी आगे की कानूनी चुनौती पर विचार करने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पूरी रकम तय समयसीमा में जमा होती है या नहीं और इसके बाद अदालत मामले में क्या रुख अपनाती है।

फिलहाल राजपाल यादव के लिए यह मामला उनके करियर के सबसे मुश्किल कानूनी अध्यायों में से एक बना हुआ है। एक तरफ अदालत की सख्ती है, दूसरी तरफ अभिनेता अपने आर्थिक नुकसान और फिल्म से जुड़ी परेशानियों का हवाला दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने जरूर इस मामले में एक अलग रंग जोड़ दिया है, लेकिन असली मुद्दा अब भी वित्तीय भुगतान और कानूनी प्रक्रिया ही है।

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