बॉलीवुड के एक्शन हीरो और सुलझे हुए अभिनेता सुनील शेट्टी ने हाल ही में बॉलीवुड फिल्मों की गिरती गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि आजकल की फिल्मों में गहराई, कहानी और भावनाओं की जगह सिर्फ वॉट्सऐप जोक्स का तड़का लगाया जा रहा है, जो लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जगह नहीं बना पाते।
सुनील शेट्टी ने कहा, “पहले फिल्मों में इमोशन होता था, परिवार होता था, रिश्तों की अहमियत होती थी। आजकल कॉमेडी के नाम पर सिर्फ वॉट्सऐप फॉरवर्ड्स जैसी पंचलाइंस परोस दी जाती हैं।” उनके इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया दोनों में हलचल मचा दी है।
‘हेरा फेरी 3’ को लेकर उत्साह
सुनील शेट्टी ने ‘हेरा फेरी 3’ के बारे में भी उत्साह जताया। जब उनसे फिल्म में परेश रावल की वापसी को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, परेश भाई फिर से साथ हैं… लेकिन ज्यादा बोल दूं तो नजर लग जाती है।” इस चुटीले जवाब से ये साफ है कि वो खुद भी इस फ्रेंचाइज़ी को लेकर काफी उत्साहित हैं।
‘हेरा फेरी’ सीरीज भारतीय सिनेमा की सबसे आइकॉनिक कॉमेडी फिल्मों में से एक है। बाबू भैया (परेश रावल), श्याम (सुनील शेट्टी) और राजू (अक्षय कुमार) की तिकड़ी ने दर्शकों को सालों तक हंसाया है। ‘हेरा फेरी 3’ की खबरें आते ही सोशल मीडिया पर फैंस की खुशी देखने लायक थी।
फिल्मों के बदलते स्वरूप पर चिंता
सुनील शेट्टी ने कहा कि फिल्मों का कंटेंट पहले जैसा नहीं रहा। आजकल तकनीक और सोशल मीडिया को ध्यान में रखकर फिल्में बनाई जा रही हैं। निर्देशक अब कहानी के बजाय मेमे-क्लिप और इंस्टेंट वायरल डायलॉग बनाने पर फोकस करते हैं। उन्होंने कहा, “बिना स्क्रिप्ट वाली फिल्मों से दर्शक 10 मिनट हंस सकते हैं, लेकिन याद हमेशा वही फिल्में रहती हैं जो दिल को छू जाएं।”
उन्होंने पुराने जमाने की फिल्में जैसे ‘हम’, ‘दिलवाले’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘बॉर्डर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इन फिल्मों में भावनाएं, देशभक्ति और पारिवारिक मूल्य थे। आज की फिल्में चमक-दमक और सोशल मीडिया के ट्रेंड पर टिक गई हैं।
असली कॉमेडी बनाम बनावटी मज़ाक
‘हेरा फेरी’ जैसी फिल्में सफल होने का कारण यही था कि उनमें सिचुएशनल कॉमेडी थी, न कि जबरदस्ती ठूंसी गई पंचलाइन। सुनील शेट्टी ने कहा, “कॉमेडी वो होती है जो हालातों से निकले, न कि जो किसी फॉरवर्ड मैसेज से उठाई गई हो।” इस बयान से उन्होंने साफ कर दिया कि आज की स्क्रिप्ट में मौलिकता की कमी है।
फिल्म इंडस्ट्री को सलाह
अपने अनुभव के आधार पर सुनील शेट्टी ने युवा निर्माताओं को सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों की भावनाओं को समझना होगा। बिना आत्मा वाली फिल्मों से शायद ओपनिंग मिल जाए, लेकिन वो लंबे समय तक नहीं टिकतीं। उन्होंने कहा, “अगर हेरा फेरी जैसी फिल्में आज भी प्रासंगिक हैं, तो उसके पीछे उसकी दिल से कही गई कहानी है।”
📌 निष्कर्ष:
सुनील शेट्टी का बयान एक गहरा संकेत है कि फिल्म इंडस्ट्री को आत्ममंथन करने की जरूरत है। दर्शक आज भी कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं और ‘हेरा फेरी 3’ जैसी फिल्मों से उन्हें उम्मीदें हैं। केवल ट्रेंड्स और वायरल पंचलाइन पर फिल्में बनाना, लंबे समय के लिए सिनेमा को खोखला कर देगा।