बॉलीवुड में हॉरर और थ्रिलर फिल्मों की परंपरा धीरे-धीरे गहराती जा रही है। इसी कड़ी में काजोल स्टारर फिल्म ‘मां’ ने दर्शकों को डर और भावनाओं की दिलचस्प यात्रा पर ले जाने की कोशिश की है। फिल्म ने न सिर्फ सस्पेंस से लोगों को बांधे रखा, बल्कि अपनी मजबूत एक्टिंग और स्टोरीलाइन से ‘मुंज्या’ और ‘परी’ जैसी फिल्मों की याद भी ताज़ा कर दी।
इस रिव्यू में जानिए कि आखिर क्यों ‘मां’ बनी है 2025 की सबसे चर्चित थ्रिलर फिल्मों में से एक।
🎬 कहानी में क्या है खास?
फिल्म ‘मां’ एक सिंगल मदर सुजाता (काजोल) की कहानी है, जो अपने बेटे अनिकेत के साथ एक छोटे से कस्बे में रहती है। सुजाता एक लाइब्रेरियन है, जिसकी जिंदगी शांत और सामान्य चल रही होती है। लेकिन सब कुछ तब बदल जाता है, जब उनके घर में अजीब घटनाएं होने लगती हैं—कभी दरवाजे अपने आप खुलना, कभी चीज़ों का इधर-उधर होना, और कभी बेटे के चेहरे पर अजीब डर।
जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, सुजाता को समझ आता है कि यह कोई आम घटना नहीं, बल्कि उसके अतीत से जुड़ा एक रहस्य है, जो अब उसके बेटे के जीवन को खतरे में डाल रहा है। फिल्म की कहानी धीरे-धीरे एक ओकल्ट थ्रिलर की ओर मुड़ती है, जिसमें एक आत्मा, एक पुरानी किताब, और एक मां की ममता का युद्ध देखने को मिलता है।
⭐ काजोल की दमदार परफॉरमेंस
काजोल ने इस फिल्म में खुद को पूरी तरह से झोंक दिया है। एक मां के रूप में उनका दर्द, डर, और जज्बा बखूबी नजर आता है। खासकर उस सीन में जब वह आत्मा से अपने बेटे को बचाने की कोशिश करती हैं, तो उनकी आंखों में झलकती बेबसी और जुनून दर्शकों को भावुक कर देता है। ये फिल्म पूरी तरह से काजोल के कंधों पर टिकी है और उन्होंने निराश नहीं किया।
🎥 निर्देशन और तकनीकी पक्ष
डायरेक्टर अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने फिल्म को एक धीमी पर मजबूत गति से आगे बढ़ाया है। कैमरा एंगल्स, बैकग्राउंड स्कोर और साउंड डिजाइन इतने सटीक हैं कि कई जगहों पर दर्शक वाकई चौंक जाते हैं। खासकर फिल्म का सेकंड हाफ आपको सीट से हिलने नहीं देता।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी प्रशंसा योग्य है। पुराने कस्बे की गलियां, सुनसान लाइब्रेरी, और रात के दृश्यों में डर पैदा करने का प्रयास सफल होता है।
🧩 क्या है कमजोरियां?
हालांकि फिल्म की कहानी में थ्रिल है, लेकिन कुछ हिस्से प्रेडिक्टेबल लगते हैं। पहले हाफ में कहानी थोड़ी खिंचती है और कई सवाल अधूरे रह जाते हैं, जिनके जवाब अंतिम 20 मिनट में दिए जाते हैं। यदि एडिटिंग थोड़ी क्रिस्प होती तो फिल्म का असर और गहरा हो सकता था।
💡 क्यों देखनी चाहिए ‘मां’?
- काजोल की बेहतरीन परफॉर्मेंस
- थ्रिल और इमोशन का अच्छा मेल
- रहस्य और हॉरर का संतुलन
- मजबूत क्लाइमैक्स और मैसेज
यह फिल्म उन सभी के लिए है जो हॉरर फिल्मों से सिर्फ डर नहीं, एक भावनात्मक जुड़ाव और सस्पेंस भी चाहते हैं।
📌 निष्कर्ष:
‘मां’ एक सस्पेंसफुल थ्रिलर है, जो दर्शकों को डर और ममता के द्वंद्व में डुबो देती है। फिल्म भले ही हर किसी की पसंद न बने, लेकिन कंटेंट और परफॉर्मेंस की कसौटी पर यह खरी उतरती है। ‘मुंज्या’ और ‘परी’ की तर्ज पर बनी यह फिल्म काजोल के करियर का एक यादगार अध्याय बन सकती है।