फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों के अनुसार, ‘बैटल ऑफ गलवान’ सीधे तौर पर किसी एक वास्तविक सैनिक की बायोपिक नहीं है। यानी इसे कर्नल संतोष बाबू की व्यक्तिगत जीवन कहानी या बायोग्राफिकल फिल्म कहना सही नहीं होगा। बताया जा रहा है कि यह फिल्म गलवान घाटी की संघर्षपूर्ण और भावनात्मक पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर लिखी गई है, लेकिन इसमें काल्पनिक किरदार, सिनेमैटिक प्रेजेंटेशन और ड्रामेटिक नैरेटिव जोड़ा गया है। यह फिल्म भारतीय सैनिकों की बहादुरी, त्याग, अनुशासन और देश के लिए जान न्यौछावर करने के जज़्बे को दिखाने पर ज्यादा फोकस करेगी।
दरअसल, जब भी कोई फिल्म सैन्य घटनाओं पर आधारित होती है, तो दर्शकों के मन में यह उत्सुकता स्वाभाविक होती है कि फिल्म कितनी सच्चाई पर आधारित है और किन वास्तविक किरदारों की कहानी को पर्दे पर लाया जा रहा है। ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर भी यही सवाल उठा। हालांकि ताजा जानकारी के अनुसार फिल्म गलवान घटना की प्रेरणा जरूर लेगी, लेकिन इसे पूरी तरह डॉक्यूमेंटरी या बायोपिक स्टाइल में नहीं बनाया जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े पैमाने की कमर्शियल, इमोशनल और देशभक्ति से भरी वॉर-ड्रामा फिल्म के रूप में पेश किया जाएगा।
सलमान खान के इस फिल्म से जुड़ने के बाद दर्शकों की उम्मीदें पहले से ही काफी बढ़ चुकी हैं। यह पहली बार होगा जब सलमान इतने गंभीर, देशभक्ति और रियल इंसिडेंट्स से जुड़े विषय पर बड़े स्केल की फिल्म में नजर आएंगे। उनका ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस, मजबूत पर्सनालिटी और देशभक्ति का भाव इस फिल्म को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने वाला है। माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बनने वाली है, जो देश के हर उस सैनिक को सलाम करेगी जिसने सीमा पर अपना सब कुछ देश के नाम कर दिया।
फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि मेकर्स ने कहानी लिखते समय काफी रिसर्च की है। सेना के अनुशासन, युद्ध की जमीनी सच्चाइयों, सैनिकों के मानसिक संघर्ष और परिवारों की भावनाओं को भी कहानी में शामिल किया गया है। हालांकि वास्तविक पात्रों के नाम का सीधा इस्तेमाल न करने का फैसला इसी सम्मान और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या विवाद पैदा न हो।
सोशल मीडिया पर हालांकि यह बहस जारी है। एक वर्ग जहां चाहता है कि कर्नल संतोष बाबू और शहीद हुए सैनिकों पर एक सीधी बायोपिक बने, वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि घटना से प्रेरित फिल्म भी उतनी ही प्रभावशाली और जरूरी है, क्योंकि इससे व्यापक पैमाने पर भारतीय सेना की वीरता की कहानी लोगों तक पहुंचेगी। जनता का उत्साह देख कर साफ है कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही यह जबरदस्त चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव हासिल कर चुकी है।
कुल मिलाकर बात साफ यह होती दिख रही है कि ‘बैटल ऑफ गलवान’ सीधे तौर पर कर्नल संतोष बाबू की बायोपिक नहीं है, लेकिन यह फिल्म निश्चित रूप से गलवान घाटी के उन वीर नायकों की बहादुरी को सलाम करेगी जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। अब सभी की निगाहें इस फिल्म की रिलीज और सलमान खान के दमदार अवतार पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म दर्शकों के दिलों में कितनी गहराई तक अपनी छाप छोड़ पाती है।