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ऑस्कर की दौड़ से बाहर हुई ‘होमबाउंड’, करण जौहर भावुक बोले– हार में भी गर्व और सीख

भारतीय सिनेमा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाना हमेशा गर्व की बात रही है। इसी उम्मीद के साथ फिल्म ‘होमबाउंड’ को ऑस्कर की रेस में भेजा गया था, लेकिन अब यह खबर सामने आई है कि यह फिल्म ऑस्कर की दौड़ से बाहर हो गई है। इस फैसले के बाद फिल्म के निर्माता करण जौहर भावुक नजर आए और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया साझा की।

‘होमबाउंड’ का ऑस्कर सफर

‘होमबाउंड’ को एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी के तौर पर देखा जा रहा था। फिल्म ने कई फिल्म फेस्टिवल्स में सराहना बटोरी और आलोचकों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसी वजह से इसके ऑस्कर तक पहुंचने की उम्मीदें काफी मजबूत मानी जा रही थीं। हालांकि, कड़ी प्रतिस्पर्धा और सीमित स्लॉट्स के चलते यह फिल्म अंतिम सूची में जगह नहीं बना सकी।

करण जौहर की भावुक प्रतिक्रिया

फिल्म के ऑस्कर रेस से बाहर होने के बाद करण जौहर ने एक भावुक पोस्ट में लिखा कि वह इस सफर को लेकर बेहद गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही फिल्म ऑस्कर तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन ‘होमबाउंड’ ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने की कोशिश जरूर की। करण ने इसे हार नहीं, बल्कि एक सीख और अनुभव बताया।

टीम की मेहनत को किया सलाम

करण जौहर ने फिल्म की पूरी टीम—डायरेक्टर, कलाकारों और तकनीकी स्टाफ—की जमकर तारीफ की। उनके मुताबिक, इस फिल्म पर काम करने वाले हर व्यक्ति ने दिल से मेहनत की और अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में बनाना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें कमर्शियल से ज्यादा भावनात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी होती है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया

फिल्म के ऑस्कर रेस से बाहर होने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ फैंस ने निराशा जताई, तो कई लोगों ने करण जौहर और उनकी टीम का हौसला बढ़ाया। यूजर्स का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय पहचान सिर्फ अवॉर्ड से नहीं, बल्कि कहानी और प्रभाव से बनती है।

भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान

हाल के वर्षों में भारतीय फिल्में लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। चाहे वह नामांकन हो या अवॉर्ड्स, हर साल भारत से कुछ ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो दुनिया का ध्यान खींचती हैं। ‘होमबाउंड’ भले ही ऑस्कर की दौड़ से बाहर हो गई हो, लेकिन इसने यह साबित किया कि भारतीय सिनेमा की कहानियां वैश्विक दर्शकों से जुड़ने की क्षमता रखती हैं

करण जौहर का सकारात्मक नजरिया

करण जौहर ने अपने बयान में साफ किया कि वह इस अनुभव को एक पॉजिटिव स्टेप के तौर पर देखते हैं। उन्होंने कहा कि हर सफर का अंत जीत से नहीं होता, लेकिन हर सफर कुछ न कुछ सिखाकर जरूर जाता है। यह अनुभव उन्हें और बेहतर सिनेमा बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

आगे क्या?

फिल्म के ऑस्कर रेस से बाहर होने के बावजूद ‘होमबाउंड’ को मिलने वाली चर्चा और सराहना इसकी असली उपलब्धि मानी जा रही है। करण जौहर और उनकी टीम आने वाले समय में भी ऐसी कहानियां लाने का इरादा रखती है, जो दिल से जुड़ी हों और समाज पर असर छोड़ें।

निष्कर्ष

‘होमबाउंड’ का ऑस्कर तक न पहुंच पाना भले ही एक निराशाजनक खबर हो, लेकिन करण जौहर की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि सिनेमा सिर्फ अवॉर्ड्स के लिए नहीं बनता। गर्व, सीख और अनुभव—यही इस सफर की असली कमाई है। भारतीय सिनेमा का यह कदम भविष्य में और बड़ी उपलब्धियों की नींव रख सकता है।


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