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पाकिस्तान में फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर विवाद गहराया, रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना पर FIR की मांग तेज

रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना की हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में तूल पकड़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि फिल्म में दिवंगत पाकिस्तानी नेता जुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी को आतंकवाद समर्थक के तौर पर दिखाया गया है। इसी को लेकर रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की जा रही है।

यह विवाद सामने आते ही सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है। पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिससे उनकी राजनीतिक छवि और देश की भावनाएं आहत हुई हैं।

क्या है आरोप?

पाकिस्तान में उठे विरोध के अनुसार, फिल्म ‘धुरंधर’ में दिखाए गए कुछ सीन और संवाद सीधे तौर पर भुट्टो की पार्टी को चरमपंथ और आतंकवाद से जोड़ते हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यह न सिर्फ गलत है, बल्कि जानबूझकर किया गया राजनीतिक प्रोपेगैंडा है।

पाकिस्तानी वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि फिल्म से जुड़े कलाकारों और मेकर्स पर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना के नाम लेकर FIR की बात कही जा रही है।

सोशल मीडिया पर भड़का विवाद

जैसे ही यह खबर सामने आई, पाकिस्तान और भारत—दोनों देशों में सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। पाकिस्तान में #BanDhurandhar और #BhuttoRespect जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, वहीं भारत में कई यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए समर्थन किया।

भारतीय यूजर्स का कहना है कि यह एक फिक्शनल फिल्म है, जिसे एंटरटेनमेंट के नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक हथियार की तरह। वहीं पाकिस्तानी यूजर्स इसे अपनी राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़कर देख रहे हैं।

फिल्ममेकर्स और कलाकारों की चुप्पी

अब तक रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना या फिल्म के मेकर्स की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मेकर्स कानूनी सलाह ले रहे हैं और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

यह पहला मौका नहीं है जब ‘धुरंधर’ विवादों में आई हो। इससे पहले भी फिल्म पर धार्मिक और राजनीतिक भावनाएं आहत करने के आरोप लग चुके हैं, जिन पर भारत में भी चर्चाएं हुई थीं।

क्या कलाकारों पर बनता है केस?

फिल्मी जानकारों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फिल्म में काम करने वाले कलाकारों पर सीधे FIR की मांग करना कानूनी रूप से जटिल मामला है। आमतौर पर फिल्म की कहानी, स्क्रिप्ट और प्रस्तुति की जिम्मेदारी मेकर्स और निर्देशक की होती है।

हालांकि, पाकिस्तान में उठी इस मांग का प्रतीकात्मक और राजनीतिक महत्व ज्यादा माना जा रहा है, न कि कानूनी असर।

भारत-पाक के रिश्तों पर असर?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही रिश्ते संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में फिल्मों को लेकर उठने वाले विवाद अक्सर राजनीतिक रंग ले लेते हैं। ‘धुरंधर’ को लेकर हुआ यह बवाल भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि कला और सिनेमा को सीमाओं में बांधना सही नहीं है, जबकि कुछ का मानना है कि संवेदनशील इतिहास को दिखाते समय जिम्मेदारी जरूरी है।

फैंस का मिला-जुला रिएक्शन

रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना के फैंस इस खबर से हैरान हैं। कई फैंस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कलाकारों को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय विवादों में घसीटना गलत है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अगर फिल्म में सच को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है, तो सवाल उठना लाजमी है।

आगे क्या?

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान में FIR की मांग सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहती है या वाकई किसी कानूनी कार्रवाई का रूप लेती है। साथ ही, यह भी अहम होगा कि फिल्म के मेकर्स इस पूरे विवाद पर क्या सफाई देते हैं।

इतना तय है कि ‘धुरंधर’ अब सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, बल्कि भारत-पाक सियासी बहस का नया केंद्र बन चुकी है।

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