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इमरान खान के समर्थन में उतरे अभिजीत दिपके, बॉलीवुड की चुप्पी पर उठाए सवाल, मोदी के आम वाले बयान पर किया तीखा तंज

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने फिल्म इंडस्ट्री की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बॉलीवुड के कलाकारों से इमरान के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की और पूछा कि जब इंडस्ट्री अपने ही एक कलाकार के साथ खड़ी नहीं हो सकती, तो फिर किसके लिए आगे आएगी? दिपके ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आम खाने के अंदाज से जुड़े चर्चित सवाल का भी जिक्र किया, जिसके बाद उनका बयान चर्चा में आ गया।

बॉलीवुड की चुप्पी पर अभिजीत दिपके का सवाल

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बॉलीवुड के कलाकारों को सीधे संबोधित किया। उनका कहना था कि फिल्म इंडस्ट्री को इस मामले में खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। उन्होंने अपील की कि अगर कलाकार किसी दूसरे व्यक्ति के लिए आवाज नहीं उठाना चाहते, तो कम से कम अपने ही उद्योग से जुड़े इमरान खान के समर्थन में खड़े हों।

दिपके के इस बयान ने फिल्मी दुनिया में एकजुटता और सार्वजनिक मुद्दों पर कलाकारों की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री के सितारे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं, लेकिन हर विवाद पर सभी कलाकारों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आती। ऐसे में दिपके ने इसी चुप्पी को अपने सवालों का आधार बनाया।

हालांकि, बॉलीवुड के सभी कलाकार इस मामले पर चुप हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। अलग-अलग लोगों ने इमरान खान को मिले नोटिस पर अपनी राय रखी है। दिपके की टिप्पणी मुख्य रूप से उन कलाकारों को लेकर है, जिन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर समर्थन नहीं जताया है।

मोदी के आम वाले सवाल पर क्यों किया तंज?

अभिजीत दिपके ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आम खाने के तरीके से जुड़े चर्चित सवाल का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इमरान खान भारत से बाहर भेजे जाने की कार्रवाई से बचना चाहते हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री से पूछना चाहिए कि वह आम कैसे खाते हैं।

यह टिप्पणी राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर की गई थी। दिपके ने इस उदाहरण के जरिए यह सवाल उठाने की कोशिश की कि क्या किसी विदेशी नागरिक की राजनीतिक राय को लेकर अलग-अलग लोगों के मामले में अलग रवैया अपनाया जाता है। उनका संकेत अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन की ओर भी था, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में अपनी राय रखी है।

दिपके ने सवाल उठाया कि यदि एक अमेरिकी नागरिक भारत में किसी राजनीतिक दल के पक्ष में बोल सकती हैं, तो इमरान खान की आलोचनात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति को अलग नजर से क्यों देखा जा रहा है? उनके इस तर्क ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विदेशी नागरिकों के अधिकारों और भारत के इमिग्रेशन नियमों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

आखिर इमरान खान को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस?

इमरान खान आमिर खान के भांजे और ‘जाने तू… या जाने ना’, ‘आई हेट लव स्टोरीज’ तथा ‘डेल्ही बेली’ जैसी फिल्मों के अभिनेता हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह अमेरिकी नागरिक हैं और भारत में ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी OCI कार्ड के आधार पर रह रहे हैं।

10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक विरोध प्रदर्शन हुआ था। इमरान खान भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी और मुंबई के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की ओर से उन्हें 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने की खबर सामने आई।

रिपोर्टों के मुताबिक, नोटिस में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। यह सरकारी कार्रवाई है; इसके पीछे लगाए गए आरोपों और उनकी कानूनी वैधता पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

मैरी मिलबेन का उदाहरण देकर उठाए दोहरे मापदंडों के सवाल

इस विवाद में मैरी मिलबेन का जिक्र इसलिए अहम है, क्योंकि वह अमेरिकी नागरिक हैं और भारत की राजनीति पर अपनी राय रख चुकी हैं। दिपके ने इसी उदाहरण के जरिए राजनीतिक अभिव्यक्ति के मामले में समानता को लेकर सवाल किया। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति की राजनीतिक पसंद या आलोचना के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, विदेशी नागरिकों के भारत में रहने और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के अधिकार भारतीय नागरिकों से अलग हो सकते हैं। OCI कार्ड भारतीय नागरिकता नहीं देता और इस दर्जे के साथ कुछ कानूनी सीमाएं जुड़ी होती हैं। इसलिए इस मामले में राजनीतिक बहस के साथ-साथ लागू कानून और सरकारी आदेश की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

अब बॉम्बे हाईकोर्ट पर टिकी नजरें

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इमरान खान इस नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। अदालत में यह देखा जा सकता है कि नोटिस किन आधारों पर जारी किया गया और उसे चुनौती देने वाले पक्ष की दलीलें क्या हैं।

फिलहाल अभिजीत दिपके के बयान ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक और फिल्मी मोड़ दे दिया है। एक तरफ उन्होंने बॉलीवुड से इमरान खान के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है, तो दूसरी तरफ उनके बयान ने विदेशी नागरिकों के अधिकारों और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर चर्चा को तेज कर दिया है।

अब देखना होगा कि फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे कलाकार इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और इमरान खान को मिले नोटिस पर अदालत का क्या रुख रहता है। इस पूरे मामले में आरोपों, राजनीतिक टिप्पणियों और कानूनी तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी होगा।

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