अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर फिल्म ‘पद्मावत’ से जुड़े अपने पुराने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में जौहर के चित्रण को लेकर उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर बहस का विषय बनी थी। इसके बाद अभिनेत्री ने सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा। उनके मुताबिक, उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक शख्सियत का अपमान करना नहीं था, बल्कि फिल्म में जौहर के चित्रण और महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठाना था। इसी मुद्दे को लेकर शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के साथ भी उनकी तीखी बहस देखने को मिली।
‘पद्मावत’ साल 2018 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की बहुचर्चित फिल्म थी। इसमें दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती, शाहिद कपूर ने महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाई थी। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके कथानक और ऐतिहासिक प्रस्तुति को लेकर विवाद शुरू हो गया था। राजपूत संगठनों ने फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। विरोध प्रदर्शनों के कारण फिल्म की रिलीज भी काफी चर्चा में रही।
फिल्म के क्लाइमैक्स में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर भी काफी बहस हुई थी। स्वरा भास्कर ने फिल्म देखने के बाद इस दृश्य और महिलाओं के चित्रण पर अपनी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि आधुनिक दौर में महिलाओं को आत्मदाह के जरिए सम्मान बचाने वाली छवि में पेश करना परेशान करने वाला संदेश दे सकता है। उनके इसी विचार को लेकर उन्हें उस समय भी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
अब पुराने विवाद के संदर्भ में स्वरा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा था। उनका कहना है कि उनके बयान को एक विशेष अर्थ में लिया गया और सोशल मीडिया पर उसे अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। स्वरा के मुताबिक, उनका सवाल जौहर की अवधारणा और उसके सिनेमाई चित्रण को लेकर था, न कि किसी महिला या ऐतिहासिक पात्र की व्यक्तिगत बहादुरी को लेकर।
स्वरा की इस सफाई के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के साथ उनकी बहस ने विवाद को और चर्चा में ला दिया। प्रियंका चतुर्वेदी ने जौहर और राजपूत इतिहास से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के विचारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई। दोनों पक्षों की बातचीत में इतिहास, महिलाओं की भूमिका और फिल्म में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए।
प्रियंका चतुर्वेदी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रही हैं। उन्होंने कई बार महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी है। वहीं स्वरा भास्कर भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में दोनों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद होना सोशल मीडिया के लिए बड़ी चर्चा बन गया।
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू इतिहास और सिनेमा के बीच का अंतर है। ‘पद्मावत’ एक साहित्यिक रचना से प्रेरित फिल्म है और इसमें ऐतिहासिक तथ्यों के साथ सिनेमाई कल्पना का भी इस्तेमाल किया गया है। रानी पद्मावती के ऐतिहासिक अस्तित्व और उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं। ऐसे में फिल्म में दिखाए गए हर दृश्य को ऐतिहासिक तथ्य मानना उचित नहीं माना जाता।
जौहर को लेकर भी समाज में अलग-अलग विचार हैं। इतिहास में जौहर को कई लोग युद्ध और संकट के दौर में महिलाओं द्वारा उठाए गए अत्यंत कठिन कदम के रूप में देखते हैं। कुछ लोग इसे साहस और त्याग से जोड़ते हैं, जबकि दूसरी ओर कई लोग इसे पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं की मजबूरी के संदर्भ में देखते हैं। स्वरा का विरोध इसी दूसरे नजरिए के करीब माना जाता है।
फिल्म में दीपिका पादुकोण द्वारा निभाया गया रानी पद्मावती का किरदार बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया था। क्लाइमैक्स में जौहर का दृश्य फिल्म का सबसे भावनात्मक हिस्सा था। दृश्य को भव्य सेट, संगीत और सिनेमाई तकनीक के साथ फिल्माया गया था। हालांकि, इसकी भव्यता को लेकर भी सवाल उठे कि क्या ऐसी त्रासदी को इतना सौंदर्यपूर्ण रूप देना उचित है।
स्वरा की सफाई के बाद सोशल मीडिया पर भी दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि अभिनेत्री ने केवल अपनी बात स्पष्ट की है और उनकी आलोचना को गलत तरीके से पेश किया गया। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि उन्हें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर टिप्पणी करते समय शब्दों का अधिक सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। सोशल मीडिया पर बहस के दौरान कई लोगों ने पुरानी पोस्ट और बयानों को भी सामने रखा।
प्रियंका चतुर्वेदी और स्वरा भास्कर के बीच हुई बहस ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग भी दे दिया। हालांकि, मूल विवाद एक फिल्म और उसमें दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर है। यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि बॉलीवुड की कोई फिल्म रिलीज होने के कई साल बाद भी सामाजिक और सांस्कृतिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी पुराने बयान को दोबारा वायरल कर सकता है। किसी कलाकार की वर्षों पुरानी टिप्पणी अचानक नए विवाद को जन्म दे सकती है। ‘पद्मावत’ से जुड़ा यह मामला भी कुछ ऐसा ही दिखाई देता है। स्वरा की नई सफाई के बाद अब बहस फिर से उसी सवाल पर लौट आई है कि फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं और संवेदनशील परंपराओं को किस तरह दिखाया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, स्वरा भास्कर ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा था। उनका विरोध जौहर के चित्रण और महिलाओं को इस तरह प्रस्तुत किए जाने को लेकर था। वहीं प्रियंका चतुर्वेदी के साथ बहस ने मामले को और सुर्खियों में ला दिया है। ‘पद्मावत’ से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर दिखाता है कि इतिहास, सिनेमा और सामाजिक संवेदनाओं का मेल कितना संवेदनशील विषय हो सकता है। इस मामले में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन बहस तथ्यों, संदर्भों और सम्मानजनक भाषा के साथ हो तो उससे मुद्दे को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।