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‘मिर्जापुर द मूवी’ के बोल्ड सीन पर सेंसर की कैंची, 35 सेकंड हटे, गालियां म्यूट हुईं, ए सर्टिफिकेट के बाद बढ़ा विवाद

‘मिर्जापुर’ की दुनिया अब ओटीटी से निकलकर बड़े पर्दे पर पहुंचने वाली है, लेकिन थिएटर रिलीज से पहले ही फिल्म सेंसर बोर्ड के फैसले को लेकर चर्चा में आ गई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC ने A सर्टिफिकेट दिया है। हालांकि, फिल्म को प्रमाणित करने से पहले सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलाव भी करवाए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उन इंटीमेट सीन्स को लेकर है, जिनमें से कुल करीब 35 सेकंड की सामग्री हटाई गई है। इसके अलावा कई गालियों और आपत्तिजनक शब्दों को म्यूट या बदला गया है।

‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी अपनी कच्ची, बेबाक और हिंसक दुनिया के लिए जानी जाती है। वेब सीरीज में दर्शकों ने जिस तरह की भाषा, एक्शन, अपराध और रिश्तों की जटिलता देखी है, उसी अंदाज को बड़े पर्दे पर देखने की उम्मीद फैंस कर रहे हैं। ऐसे में सेंसर बोर्ड की ओर से किए गए बदलावों ने रिलीज से पहले ही फैंस के बीच बहस छेड़ दी है। हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है, यानी इसे सिर्फ वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसर बोर्ड ने फिल्म के दो इंटीमेट सीक्वेंस में बदलाव करवाए हैं। एक सीन फिल्म के पहले हिस्से में है, जबकि दूसरा इंटरवल के बाद आता है। दोनों दृश्यों में विजुअल और साउंड को लगभग 50 फीसदी तक कम करने के निर्देश दिए गए। इन बदलावों के बाद कुल मिलाकर करीब 35 सेकंड की सामग्री फिल्म से हटाई गई। यानी सेंसर बोर्ड ने पूरी तरह से ऐसे दृश्यों को हटाने के बजाय उनकी अवधि और प्रस्तुति को सीमित किया है।

दिलचस्प बात यह है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के हिंसक और गोर दृश्यों पर कोई कट नहीं लगाया। ‘मिर्जापुर’ की पहचान ही अपराध और हिंसा से जुड़े दृश्यों के कारण बनी है, इसलिए यह फैसला भी चर्चा में है। एक तरफ इंटीमेट कंटेंट में कटौती की गई, वहीं दूसरी तरफ हिंसक दृश्यों को बरकरार रखा गया। इससे सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठ रहा है कि सेंसर बोर्ड की प्राथमिकताएं किस तरह तय होती हैं।

इंटीमेट सीन्स के अलावा फिल्म की भाषा पर भी सेंसर बोर्ड ने कई बदलाव करवाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार जगह गालियों को म्यूट किया गया है, जबकि छह जगह आपत्तिजनक शब्दों को दूसरे शब्दों से बदला गया। कुछ संवादों में भी बदलाव किए गए हैं। एक जातिसूचक संदर्भ को भी संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मतलब यह है कि फिल्म की भाषा को पूरी तरह हटाया नहीं गया, लेकिन कुछ हिस्सों को सिनेमाघरों के लिए संशोधित किया गया है।

फिल्म की लंबाई भी काफी ज्यादा है। सेंसर प्रमाणपत्र के मुताबिक ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का रनटाइम 197 मिनट 19 सेकंड, यानी लगभग 3 घंटे 17 मिनट है। इतनी लंबी फिल्म होने के बावजूद मेकर्स ने कहानी को बड़े पर्दे के लिए विस्तार देने की कोशिश की है। लंबे रनटाइम के कारण भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या देखने को मिलेगा, जिसे तीन घंटे से ज्यादा समय में दिखाया गया है।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में फ्रेंचाइजी के कई लोकप्रिय किरदार वापस नजर आने वाले हैं। अली फजल एक बार फिर गुड्डू पंडित के रूप में दिखाई देंगे, जबकि पंकज त्रिपाठी कालीन भैया के किरदार में वापसी कर रहे हैं। दिव्येंदु भी मुन्ना त्रिपाठी के रूप में नजर आएंगे। श्वेता त्रिपाठी शर्मा और श्रिया पिलगांवकर जैसे कलाकार भी फ्रेंचाइजी से जुड़े किरदारों को आगे बढ़ाते दिखेंगे।

फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह हैं और इसे ‘मिर्जापुर’ की लोकप्रिय दुनिया को सिनेमाई रूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ओटीटी पर बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब इस फ्रेंचाइजी के सामने चुनौती यह है कि क्या थिएटर दर्शक भी उसी उत्साह के साथ फिल्म को स्वीकार करेंगे। फिल्म के किरदार पहले से लोकप्रिय हैं, इसलिए मेकर्स को रिलीज से पहले ही मजबूत फैन बेस का फायदा मिल रहा है।

सेंसर कट को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ फैंस का मानना है कि ‘मिर्जापुर’ की असली पहचान उसकी बेबाक भाषा और बोल्ड प्रस्तुति है, इसलिए उसमें किसी भी तरह की कटौती उसके मूल अंदाज को प्रभावित कर सकती है। वहीं दूसरी ओर कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म को थिएटर के नियमों के अनुसार प्रमाणित करना जरूरी है और A सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी मेकर्स ने फ्रेंचाइजी की मूल भावना को काफी हद तक बरकरार रखा है।

दरअसल, सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया हमेशा से फिल्मों के निर्माताओं और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रही है। ओटीटी और सिनेमाघरों के बीच प्रमाणन के नियम अलग होने के कारण किसी वेब सीरीज के सिनेमाई संस्करण में बदलाव की संभावना रहती है। ‘मिर्जापुर’ जैसे शो के लिए यह चुनौती और बड़ी है, क्योंकि इसकी लोकप्रियता ही उसके बोल्ड और अनफिल्टर्ड अंदाज से जुड़ी रही है।

इसके बावजूद फिल्म को A सर्टिफिकेट मिलना इस बात का संकेत है कि मेकर्स को वयस्क दर्शकों के लिए अपनी कहानी और ट्रीटमेंट काफी हद तक बनाए रखने की अनुमति मिली है। सेंसर बोर्ड ने बदलाव जरूर किए, लेकिन फिल्म के हिंसक दृश्यों को बरकरार रखा गया और पूरी तरह से इसकी शैली को बदलने की कोशिश नहीं की गई।

अब फिल्म की रिलीज का इंतजार है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। एडवांस बुकिंग को लेकर भी दर्शकों में उत्साह दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सेंसर कट के बाद फिल्म दर्शकों को कितनी पसंद आती है और क्या गुड्डू पंडित, कालीन भैया और मुन्ना त्रिपाठी की सिनेमाई वापसी बॉक्स ऑफिस पर नया रिकॉर्ड बना पाती है।

कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ पर सेंसर की कैंची चलने के बावजूद फिल्म को A सर्टिफिकेट मिल गया है और इसकी मूल पहचान काफी हद तक बरकरार दिखाई देती है। करीब 35 सेकंड के इंटीमेट सीन्स हटाए गए हैं, कई गालियां म्यूट या बदली गई हैं, लेकिन हिंसक दृश्यों में कोई कट नहीं लगाया गया। अब असली फैसला थिएटर में दर्शक करेंगे कि सेंसर बदलावों के बाद भी ‘मिर्जापुर’ का वही पुराना भौकाल कायम रहता है या नहीं।

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