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तंत्र-मंत्र और कमजोर कहानी में उलझी प्रभास की ‘राजा साब’, डराने के बजाय दर्शकों को करती है निराश

साउथ सुपरस्टार प्रभास की फिल्म ‘द राजा साब’ (The Raja Saab) को लेकर दर्शकों में काफी समय से उत्सुकता थी। फिल्म का नाम, पोस्टर्स और प्रमोशनल कंटेंट देखकर यह उम्मीद की जा रही थी कि यह एक अलग तरह की हॉरर-कॉमेडी होगी, जिसमें डर, हंसी और रहस्य का मजेदार मेल देखने को मिलेगा। लेकिन फिल्म देखने के बाद जो अनुभव सामने आता है, वह इन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत और रहस्यमयी हवेली के चक्कर में फंसी यह फिल्म दिमाग को उलझा देती है और कई जगहों पर दर्शकों का मूड खराब कर देती है।

फिल्म की कहानी एक रहस्यमयी हवेली के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां अजीब घटनाएं होती हैं और तंत्र-मंत्र से जुड़ा एक पुराना राज छिपा होता है। प्रभास का किरदार एक ऐसे इंसान का है, जो हालात के चलते इस हवेली और वहां के अंधेरे सच से टकराता है। शुरुआत में फिल्म थोड़ी दिलचस्प लगती है और लगता है कि आगे कोई बड़ा ट्विस्ट या डरावना मोड़ आने वाला है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वही पुराने हॉरर ट्रॉप्स, शोर-शराबे वाले सीन और कमजोर कॉमेडी हावी हो जाती है।

फिल्म का सबसे बड़ा कमजोर पक्ष इसकी स्क्रिप्ट है। तंत्र-मंत्र और हॉरर के नाम पर जो कुछ परोसा गया है, वह न तो डराता है और न ही रोमांचित करता है। कई सीन ऐसे हैं जो बिना किसी ठोस वजह के डाले गए लगते हैं। डर पैदा करने के बजाय अचानक आने वाली आवाजें और जरूरत से ज्यादा बैकग्राउंड म्यूजिक दिमाग को “फ्राई” करने लगते हैं। हॉरर-कॉमेडी के नाम पर जो संतुलन होना चाहिए था, वह पूरी तरह बिगड़ा हुआ नजर आता है।

प्रभास की परफॉर्मेंस की बात करें तो वह पूरी ईमानदारी से अपने किरदार में जान डालने की कोशिश करते दिखते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह दमदार है और फैंस को उन्हें बड़े पर्दे पर देखना अच्छा लगेगा। लेकिन कमजोर कहानी और ढीले डायलॉग्स उनके अभिनय को पूरी तरह उभरने नहीं देते। कई जगह ऐसा लगता है कि प्रभास जैसे स्टार को इस तरह के आधे-अधूरे किरदार में सीमित कर दिया गया है।

सपोर्टिंग कास्ट ने भी ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन उन्हें भी स्क्रिप्ट का सहारा नहीं मिल पाता। कुछ किरदार सिर्फ कॉमिक रिलीफ के लिए डाले गए हैं, जिनके जोक्स कई बार जबरदस्ती के लगते हैं। हंसी निकालने की कोशिश में फिल्म कई सीन को खींच देती है, जिससे कहानी की रफ्तार और धीमी हो जाती है।

डायरेक्शन और ट्रीटमेंट भी फिल्म को बचा नहीं पाते। हॉरर माहौल बनाने के लिए अंधेरे विजुअल्स, धुएं और डरावने चेहरे दिखाए जाते हैं, लेकिन इनमें नयापन नहीं है। दर्शक पहले भी ऐसी चीजें कई फिल्मों में देख चुके हैं। तंत्र-मंत्र को जिस तरह से दिखाया गया है, वह ज्यादा बनावटी लगता है और कहानी से भावनात्मक जुड़ाव नहीं बना पाता।

फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर जरूरत से ज्यादा तेज और भारी है। जहां डर पैदा करने के लिए साइलेंस काम आ सकता था, वहां लगातार शोर सुनने को मिलता है। इससे सीन का असर कम होने के बजाय और ज्यादा चिढ़ पैदा करता है। कुछ गाने अच्छे हैं, लेकिन वे कहानी के फ्लो को तोड़ते हैं।

कुल मिलाकर, ‘द राजा साब’ एक ऐसी फिल्म बनकर रह जाती है, जो आइडिया के स्तर पर ठीक लगती है लेकिन एग्जीक्यूशन में बुरी तरह फेल हो जाती है। प्रभास के नाम और हॉरर-कॉमेडी के कॉन्सेप्ट के बावजूद फिल्म दर्शकों को बांध नहीं पाती। अगर आप प्रभास के कट्टर फैन हैं, तो एक बार देख सकते हैं, लेकिन मजबूत कहानी और सच्चे डर की उम्मीद लेकर जाएंगे तो निराशा हाथ लग सकती है।


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